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गीता की यादें...

  गीता हमारे पड़ोस में रहती थी। पड़ोस में मतलब हमारे घर से 3-4 घर आगे। गीता के पिता जी नायर अंकल पप्पा के अच्छे दोस्त थे। और राधा आंटी और मम्मी की भी बहुत बनती थी। वे अक्सर हमारे घर आया करते थे। कभी कबार गीता भी उनके साथ आती थी। जब वो घर आती थी तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। उसका एक बड़ा भाई भी है, गणेश। वो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता था। बहुत घमंडी था, झगड़ालू भी। जब वे नए नए हमारे घर के पास रहने आये तब वो  सातवीं  में पढ़ता था। हमेशा बड़ी बड़ी बातें करता था। " सातवीं  में ये सिखाते है वो सिखाते है, हमारे टीचर और मास्टर छोटे कक्षाओं के टीचर और मास्टरों से ज़्यादा अच्छे हैं, अगले साल से में पेंट पहनके स्कूल जाऊँगा" वगैरह वगैरह। मैं उसकी तरफ़ ध्यान ही नहीं देता था। गीता अपने भाई के जैसे नहीं थी। बहुत प्यारी थी। जिस दिन वो हमारे कॉलोनी आये और नायर अंकल लारी से सामान उतरवा रहे थे तब वो भी अपने घर के गेट के पास बैठी थी। तभी वो मुझे बहुत पसंद आ गयी थी। मैंने सोचा था जाके उससे बात करूँ।  "मैं शारदा विद्यालय में पांचवी में पढता हूँ। तुम कौनसे स्कूल में पढ़ते हो ?"  २-३ बार मन...